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Showing posts from March, 2017
कोई नहीं है दुश्मन अपना फिर भी परेशान हूँ मैं,अपने ही क्यूँ दे रहे है जख्म इस बात से हैरान हूँ मैं 
कितनी खुबसूरत सी हो जाती है, उस वक़्त दुनिया,
जब हमारा अपना कोई कहता है, तुम याद आ रहे हो..
मेरी मोहबत की मजार तो आज भी वहीं है,
बस तेरे ही सजदे की जगह बदल गई..!!
मौत की हिम्मत कहा थी मुझसे टकराने की साली ने मोहब्बत को मेरी सुपारी दे डाली
तू रूठा रूठा सा लगता है कोई तरकीब बता मनाने की..!!!
मैं ज़िन्दगी गिरवी रख दूंगा तू क़ीमत बता मुस्कुराने की..!!!!
हँसना और हँसाना कोशिश है मेरी,

हर कोई खुश रहे, यह चाहत है मेरी,

भले ही मुझे कोई याद करे या ना करे,

लेकिन हर अपने को याद करना आदत है मेरी.
किस्से तो तेरे सरेआम मशहूर थे बेवफाई के...

पर दिल ये नादान किस्सो पे नही तुझ पे मरता था