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Showing posts from April, 2017
ढून्ढ तो लेते तुम्हे हम,,
शहर में भीड़ इतनी भी न थी,,,
पर रोक दी तलाश हमने क्योंकि,
तुम खोये नहीं थे, बदल गये थे..
हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर,
तुझ पर ज़रा भी ज़ोर होता मेरा,
ना रोते हम यूँ तेरे लिये..
अगर हमारी ज़िन्दगी में तेरे सिवा कोई ओर होता..